Report by : Dr. Ravindra Rana
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पुण्यतिथि विशेष | गांव की जमीन से कारोबार खड़ा करने वाले शख्स की कहानी, बेटे ने राजनीति में बनाई अलग पहचान

कुछ लोग अपनी जिंदगी में केवल कारोबार नहीं खड़ा करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक रास्ता भी बनाते हैं। चौधरी वेदराम नागर ऐसी ही शख्सियत थे। ग्रामीण परिवेश से निकलकर दूध के कारोबार में अपनी पहचान बनाने वाले वेदराम नागर ने जिस सफर की शुरुआत की, वह आगे चलकर पारस समूह की स्थापना तक पहुंचा।

आज उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना एक ऐसे व्यक्ति के संघर्ष को याद करना है, जिसने छोटे स्तर से शुरुआत करके उद्यम की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। उनकी कहानी में गांव है, पशुपालन है, मेहनत है और अपने काम को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है।

60 लीटर दूध से शुरू हुआ कारोबारी सफर

चौधरी वेदराम नागर का नाम पारस समूह के संस्थापक के रूप में लिया जाता है। मीडिया में प्रकाशित उनके जीवन परिचय के अनुसार, उन्होंने लगभग 60 लीटर दूध के छोटे कारोबार से शुरुआत की थी।

दूध का कारोबार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। खेती के साथ पशुपालन और दूध की बिक्री लाखों परिवारों की आजीविका का आधार रही है। लेकिन इसी काम को बड़े कारोबारी उद्यम में बदलने के लिए मेहनत के साथ दूरदृष्टि और लगातार विस्तार की जरूरत होती है।

वेदराम नागर ने इसी क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। उनका सफर बताता है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा कोई काम भी बड़े व्यवसाय का आधार बन सकता है।

पारस समूह की स्थापना उनके कारोबारी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बनी। उनके द्वारा रखी गई नींव पर आगे चलकर परिवार ने डेयरी कारोबार को विस्तार दिया।

कारोबारी विरासत के साथ परिवार की पहचान

वेदराम नागर की विरासत का एक महत्वपूर्ण पक्ष उनके परिवार की आगे की यात्रा है। उनके बेटे सुरेंद्र सिंह नागर ने कारोबार और कृषि से जुड़े पारिवारिक परिवेश के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई।

पिता की पहचान जहां उद्यमशीलता और डेयरी कारोबार से जुड़ी रही, वहीं बेटे ने सार्वजनिक जीवन और संसदीय राजनीति में लंबा सफर तय किया।

यह एक ऐसे परिवार की कहानी भी है, जिसमें एक पीढ़ी ने कारोबार की नींव रखी और अगली पीढ़ी ने राजनीति के क्षेत्र में अपनी जगह बनाई।

सुरेंद्र सिंह नागर: विधान परिषद से लोकसभा और राज्यसभा तक

चौधरी सुरेंद्र सिंह नागर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म 10 मई 1965 को गुलावठी, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने मेरठ विश्वविद्यालय, वर्तमान चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से बी.कॉम. की पढ़ाई की।

सुरेंद्र नागर का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश विधान परिषद से शुरू होकर संसद तक पहुंचा। वह वर्ष 1998 में पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य बने। वर्ष 2004 में दोबारा विधान परिषद पहुंचे।

वर्ष 2009 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट से चुनाव जीता और लोकसभा पहुंचे। इस जीत के साथ राष्ट्रीय राजनीति में उनकी पहचान बनी।

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। वर्ष 2016 में वह समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे। वर्ष 2019 में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।

इसके बाद वह भाजपा के टिकट पर फिर राज्यसभा पहुंचे। वर्ष 2022 में वह उत्तर प्रदेश से तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य चुने गए। उनका मौजूदा कार्यकाल 2028 तक निर्धारित है।

इस तरह विधान परिषद से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर लोकसभा और राज्यसभा तक पहुंचा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जिसने अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ काम करते हुए संसदीय राजनीति में अपनी जगह बनाए रखी।

पिता की स्मृति और बेटे का सफर

किसी भी परिवार की विरासत को केवल कारोबार या राजनीतिक पदों से नहीं मापा जा सकता। उसके पीछे कई दशकों की मेहनत, परिवार का सहयोग और समय के साथ बदलती परिस्थितियों से मुकाबला करने की कहानी भी होती है।

चौधरी वेदराम नागर ने डेयरी कारोबार की नींव रखी। उनके बेटे सुरेंद्र सिंह नागर ने राजनीति में अपनी पहचान बनाई। दोनों के जीवन के क्षेत्र अलग रहे, लेकिन उनके सफर में एक समान सूत्र दिखाई देता है: अपने काम के जरिए समाज में पहचान बनाना।

वेदराम नागर के जीवन की विस्तृत निजी जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में सीमित है। इसलिए उनके व्यक्तिगत संघर्षों और विचारों के बारे में अपुष्ट दावे करने के बजाय उनकी कारोबारी यात्रा और परिवार की सार्वजनिक उपलब्धियों के आधार पर उन्हें याद करना अधिक उचित है।

पुण्यतिथि पर स्मरण

चौधरी वेदराम नागर की पुण्यतिथि केवल एक व्यक्ति को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस पीढ़ी के योगदान को समझने का भी मौका है, जिसने ग्रामीण परिवेश से निकलकर कारोबार की दुनिया में अपनी जगह बनाई।

60 लीटर दूध से शुरू हुआ सफर और पारस समूह की स्थापना उनकी पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनके बाद परिवार ने इस विरासत को आगे बढ़ाया और सुरेंद्र सिंह नागर ने राजनीति में अपना अलग मुकाम बनाया।

समय बीतने के साथ व्यक्ति स्मृतियों का हिस्सा बन जाता है, लेकिन उसके द्वारा खड़ा किया गया काम और परिवार के जीवन में छोड़ी गई छाप आगे की कहानी का हिस्सा बने रहते हैं।

पुण्यतिथि पर चौधरी वेदराम नागर को स्मरण और श्रद्धांजलि। Surendra Singh Nagar

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