Report by : Dr. Ravindra Rana
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मेरठ, 26 अक्टूबर 2026। गीता फाउंडेशन, मेरठ एवं डॉ. ओ. एस. गुप्ता मेमोरियल कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में डॉ. ओ. एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यानमाला का द्वितीय व्याख्यान रविवार को डी.एन. डिग्री कॉलेज, घंटाघर चौराहा, मेरठ में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘आर्य समाज के क्रांतिकारियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान’ रहा। समारोह में शिक्षा, सामाजिक सुधार, राष्ट्रीय चेतना, गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पहलुओं पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविदों, पूर्व प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, समाजसेवियों, साहित्यकारों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। समारोह के प्रमुख आकर्षण वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन, प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् प्रो. डॉ. जगमती सागवान का व्याख्यान तथा राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की ओजस्वी काव्य प्रस्तुति रहे।

प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन, शैक्षणिक योगदान को किया याद

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समारोह में वरिष्ठ शिक्षाविद् प्रोफेसर ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन किया गया। विधि शिक्षा के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान, शैक्षणिक उपलब्धियों और विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने वाली उनकी भूमिका का उल्लेख करते हुए उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।

प्रो. गर्ग ने अपने शैक्षणिक जीवन में अनेक विद्यार्थियों को विधि शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने और अपने जीवन में सफलता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनके योगदान को याद करते हुए वक्ताओं और उपस्थित लोगों ने कहा कि एक शिक्षक की उपलब्धि केवल उसकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यक्तित्व और संस्कारों में भी दिखाई देती है।

इस अवसर पर उनके छोटे भाई डॉ. एस. पी. गर्ग ने भावपूर्ण ढंग से अभिनंदन-पत्र का वाचन किया। इसमें प्रो. गर्ग के जीवन, उपलब्धियों और शैक्षणिक योगदान को रेखांकित किया गया। उनके अनेक शिष्य और प्रशंसक भी समारोह में मौजूद रहे।

पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत, पूर्व आईएएस डॉ. प्रभात राय सहित अन्य शिष्यों की उपस्थिति ने नागरिक अभिनंदन को विशेष महत्व प्रदान किया। समारोह में गुरुजनों के सम्मान और उनके योगदान को याद रखने की परंपरा को समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।

डॉ. जगमती सागवान ने बताया स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज का योगदान

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रोफेसर डॉ. जगमती सागवान ने ‘आर्य समाज के क्रांतिकारियों का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान’ विषय पर विस्तृत और विचारोत्तेजक व्याख्यान दिया। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में आर्य समाज की वैचारिक, सामाजिक और शैक्षणिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

डॉ. सागवान ने कहा कि आर्य समाज ने शिक्षा के प्रसार, सामाजिक कुरीतियों के विरोध, महिला शिक्षा, राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आर्य समाज से प्रेरित अनेक क्रांतिकारियों ने अपने विचारों, साहस, त्याग और बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल राजनीतिक घटनाओं और आंदोलनों का विवरण नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुधार, वैचारिक जागरण और जनचेतना के विकास की कहानी भी है। सामाजिक एवं धार्मिक सुधार आंदोलनों ने भारतीय समाज में आत्मसम्मान, समानता और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में योगदान दिया।

डॉ. सागवान ने नई पीढ़ी से स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन, उनके आदर्शों और सामाजिक सुधार के प्रयासों का अध्ययन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इतिहास से प्रेरणा लेकर वर्तमान समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में काम करना आवश्यक है।

उनके व्याख्यान ने श्रोताओं को स्वतंत्रता आंदोलन के उन महत्वपूर्ण पक्षों पर विचार करने का अवसर दिया, जिनमें सामाजिक जागरण और वैचारिक आंदोलनों की भूमिका केंद्रीय रही।

डॉ. प्रभात राय ने गुरुजनों के प्रति व्यक्त की कृतज्ञता

पूर्व आईएएस डॉ. प्रभात राय ने अपने संबोधन में जीवन निर्माण में गुरुजनों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा, संस्कार और दिशा देने वाले व्यक्तित्वों का स्मरण करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि मनुष्य के व्यक्तित्व निर्माण, वैचारिक विकास और जीवन की उपलब्धियों में शिक्षकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सामाजिक उत्तरदायित्व और मानवीय मूल्यों का विकास करना भी है।

डॉ. प्रभात राय के संबोधन में गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव दिखाई दिया। पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत सहित अनेक शिष्यों और शुभचिंतकों की मौजूदगी ने इस अवसर को और भी आत्मीय बना दिया।

समारोह में इस बात को रेखांकित किया गया कि समाज में शिक्षकों और मार्गदर्शकों के योगदान को याद करना तथा आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से परिचित कराना आवश्यक है।

राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की कविता ने बांधा समां

कार्यक्रम का साहित्यिक पक्ष भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम ने अपनी ओजस्वी और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं को प्रभावित किया। उनकी कविता में मानवीय एकता, सामाजिक समरसता, समानता और संवैधानिक मूल्यों का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

उन्होंने अपनी कविता ‘कवि की प्रार्थना’ के माध्यम से समाज में व्याप्त जातिगत और धार्मिक विभाजनों से ऊपर उठकर मानवीय मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उनकी कविता की पंक्ति ‘धर्म और जातियाँ मिटाओ संविधान से’ ने सभागार में उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

इस पंक्ति के माध्यम से उन्होंने सामाजिक भेदभाव से मुक्त समाज बनाने और संविधान में निहित समानता एवं बंधुत्व के मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया। उनकी प्रभावशाली अभिव्यक्ति ने कार्यक्रम के वैचारिक वातावरण को और सशक्त बनाया।

सत्यपाल सत्यम की प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि साहित्य और कविता केवल मनोरंजन के माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जागरूक करने, सामाजिक विसंगतियों पर सवाल उठाने और लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने का भी कार्य करते हैं।

डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति ने बढ़ाई आयोजन की आत्मीयता

कार्यक्रम में स्वर्गीय डॉ. ओ. एस. गुप्ता के पुत्र डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। पिता की स्मृति में आयोजित व्याख्यानमाला ने उनके शैक्षिक, सामाजिक और वैचारिक योगदान को याद करने का अवसर प्रदान किया।

डॉ. वरद गुप्ता की सहभागिता ने समारोह को पारिवारिक आत्मीयता और भावनात्मक गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने डॉ. ओ. एस. गुप्ता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए शिक्षा और समाज के प्रति समर्पण की उनकी परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

व्याख्यानमाला का उद्देश्य केवल एक व्यक्तित्व की स्मृतियों को संजोना नहीं, बल्कि उनके विचारों, मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। इसी उद्देश्य के अनुरूप आयोजन में शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रचेतना से जुड़े विषयों को प्रमुखता दी गई।

गौतम बंधु सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति रहे मौजूद

समारोह में गौतम बंधु की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। इसके अतिरिक्त पूर्व डीजीपी एस. एम. माथुर, पूर्व आईजी अजय मोहन शर्मा, पूर्व कमिश्नर जगवीर सिंह शेरावत, पूर्व आईएएस डॉ. प्रभात राय, डॉ. वरद गुप्ता, डॉ. एस. पी. गर्ग, प्रो. ओ. पी. गर्ग और आर्य समाज से जुड़े हरवीर सुमन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

शहर के शिक्षाविदों, समाजसेवियों, साहित्यप्रेमियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने शिक्षा, सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय चेतना और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े आयोजनों को समाज के लिए उपयोगी बताया।

कार्यक्रम में वक्ताओं के विचारों और साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश उभरा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, इतिहासबोध, मानवीय संवेदना और सामाजिक एकता का मजबूत होना आवश्यक है।

अजय कुमार ने किया कार्यक्रम का संचालन

कार्यक्रम का संचालन अजय कुमार ने किया। उन्होंने अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए समारोह की विभिन्न गतिविधियों को सहज और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उनके संचालन में व्याख्यान, नागरिक अभिनंदन और काव्य प्रस्तुति जैसे कार्यक्रमों को क्रमबद्ध रूप से आगे बढ़ाया गया। समारोह में शिक्षा के प्रति समर्पण, गुरुजनों के सम्मान, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान, आर्य समाज की ऐतिहासिक भूमिका और सामाजिक एकता के संदेश को प्रमुखता मिली।

शिक्षा, साहित्य और राष्ट्रचेतना का संगम बना आयोजन

डॉ. ओ. एस. गुप्ता स्मृति व्याख्यानमाला का द्वितीय आयोजन शिक्षा, साहित्य, इतिहास और सामाजिक चेतना के संगम के रूप में सामने आया। प्रो. ओ. पी. गर्ग का नागरिक अभिनंदन जहां शिक्षकों और गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक बना, वहीं डॉ. जगमती सागवान के व्याख्यान ने स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला।

डॉ. प्रभात राय ने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता का संदेश दिया, जबकि राष्ट्रीय कवि सत्यपाल सत्यम की कविता ने सामाजिक समरसता, समानता और संवैधानिक मूल्यों की महत्ता को रेखांकित किया। डॉ. वरद गुप्ता की उपस्थिति ने आयोजन को स्वर्गीय डॉ. ओ. एस. गुप्ता की स्मृतियों से भावनात्मक रूप से जोड़ा।

समारोह ने यह संदेश दिया कि शिक्षा समाज को दिशा देती है, गुरु जीवन को संस्कार प्रदान करते हैं, साहित्य सामाजिक चेतना जगाता है और स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध पैदा करता है। ऐसे आयोजन समाज में ज्ञान, संवेदना, एकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आयोजक: डॉ. ओ. एस. गुप्ता मेमोरियल कमेटी एवं गीता फाउंडेशन, मेरठ।