Report by : Dr. Ravindra Rana
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बागपत की रेल में चढ़े सांसद सांगवान, यात्रियों की मुसीबत देख बोले- जल्द लाऊंगा मेट्रो

Dr. Ravindra Rana / Rajesh Sharma

बागपत। 14 जून 2025

बूढ़पुर गांव की सड़कों पर सन्नाटा है, लेकिन भीतर से उठती कराह सुनी जा सकती है। हर घर में कोई न कोई मरीज है — हड्डियों की कमजोरी, कैंसर, लकवा, दिल की बीमारी या पेट की तकलीफ। गांववालों का दावा है कि इन बीमारियों की जड़ है रमाला चीनी मिल से निकलने वाला जहरीला रासायनिक पानी, जो नालियों में बहकर खेतों और घरों तक पहुंचता है।

गांव में पसरे इस अघोषित आपातकाल के बीच, बागपत के सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान ने कहा है, “मैं बूढ़पुर गांव गया था, वहां की स्थिति देखी है। और मैंने सिर्फ देखा नहीं, कार्रवाई भी की है।” सांसद का दावा है कि उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार से बागपत में एम्स (AIIMS) जैसी बड़ी स्वास्थ्य सुविधा की मांग की है, बल्कि बागपत में ट्रॉमा सेंटर खुलवाने, सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) को अपग्रेड करने और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई बार पत्राचार किया है।

क्या सिर्फ चिट्ठियों से बदल जाएगी तस्वीर?

डॉ. सांगवान के मुताबिक उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बागपत के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अन्य अफसरों को लगातार पत्र लिखे हैं। उनके दावे के अनुसार:

  • एम्स बागपत की मांग को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा।
  • बागपत में ट्रॉमा सेंटर की आवश्यकता को लेकर केंद्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर पत्राचार किया गया।
  • बड़ौत और बागपत सीएचसी को आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों से सुसज्जित करने की माँग बार-बार दोहराई गई।

डॉ. सांगवान ने कहा, “मेरे पास उन सभी चिट्ठियों की कॉपियां हैं। मैं सिर्फ बात नहीं करता, दस्तावेजी साक्ष्य रखता हूँ।”

पर गांव कहता है – “अभी तक कुछ नहीं हुआ”

बूढ़पुर गांव के लोगों की पीड़ा है कि उन्हें आज तक कोई स्थायी चिकित्सा सुविधा नहीं मिली। न तो गांव में कोई स्वास्थ्य शिविर लगा, न ही कोई स्पेशल मेडिकल टीम आई। गांव के युवा अनिल ने कहा, “अगर सांसद जी लगातार लिख रहे थे, तो फिर हमारी हालत क्यों नहीं बदली?”

जनता और सिस्टम के बीच फंसी एक गांव की साँस

बूढ़पुर आज एक प्रतीक बन चुका है—सरकारी उदासीनता, पर्यावरणीय लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का। सवाल सिर्फ बागपत एम्स का नहीं, सवाल ये है कि क्या सांसद की चिट्ठियाँ धरातल पर उतरेंगी?

क्या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड़्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इन पत्रों का संज्ञान लेकर इस इलाके में मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को गंभीरता से लेंगे?

या फिर यह भी बाकी चिट्ठियों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?