Report by : Dr. Ravindra Rana
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बूढ़पुर में मौत की फसल: रमाला मिल के ज़हर में डूबता बागपत का एक गांव


Dr.Ravindra Rana / Rajesh Sharma
PoliticalAdda.com | विशेष रिपोर्ट

“गांव में दिल टूटते रहे… लेकिन जिले में कोई दिल का डॉक्टर ही नहीं था।
हड्डियां चटकती रहीं… लेकिन हड्डियों का भी कोई विशेषज्ञ नहीं था।
मरे हुए लोगों के घर तक एंबुलेंस नहीं, बहाने पहुंचे।
और जो आया… वो सिर्फ कैमरे के लिए आया।”

“बागपत” वेंटिलेटर पर है — बूढ़पुर की मौतों ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

बागपत ज़िला अस्पताल — एक ऐसा संस्थान जो नाम से जिला कहलाता है, पर इलाज में गाँव के झोलाछाप से ज़्यादा भरोसेमंद नहीं।
यहां न हृदय रोग विशेषज्ञ है, न आर्थोपेडिक।
यानी न सीना दर्द समझने वाला है, न टूटी हड्डियों का इलाज करने वाला।

बूढ़पुर की मौतों ने उठाया बड़ा सवाल — “अगर किसी को हार्ट अटैक हो, तो कहां जाए?”

बूढ़पुर गांव में 12 लोग संदिग्ध परिस्थितियों में मारे गए। अधिकतर मौतें सीने में दर्द या अचानक गिरने से हुईं।
पर जब यह सवाल जिला प्रशासन से पूछा गया कि क्या इन मौतों की मेडिकल जांच हुई?

“बागपत” वेंटिलेटर पर है — बूढ़पुर की मौतों ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

जवाब था — हमारे पास कार्डियोलॉजिस्ट ही नहीं है।

और जो भेजा गया — वो एक BAMS डॉक्टर।
उसका काम इलाज नहीं था,
बल्कि कैमरे के सामने ‘सरकारी उपस्थिति’ दिखाना था।

क्या बागपत की 20 लाख आबादी बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के रह रही है?

बिलकुल।
CMO कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार:

  • कार्डियोलॉजिस्ट: उपलब्ध नहीं
  • ऑर्थोपेडिक सर्जन: नहीं
  • टॉक्सिकोलॉजिस्ट (विष विज्ञान विशेषज्ञ): नहीं
  • न्यूरोलॉजिस्ट: नहीं
  • ICU: सीमित, संसाधनों की भारी कमी

यानि बागपत में आप बीमार पड़ें तो दुआ करें —
या तो आपका केस मामूली हो,
या फिर आप में एम्बुलेंस से मेरठ या दिल्ली तक पहुंचने की ताकत हो।

तो फिर सवाल उठता है — रमाला मिल के जहर से बीमार हुए लोगों को कहां जाना था?

जो नाला गांव के चारों ओर जहर फैला रहा है —
जिसका पानी नलकूपों तक पहुंच गया है —
जिससे सिंचाई हो रही है,
और जो ज़हर, गांव के शरीर में फैल रहा है,
उसका इलाज कौन करेगा?

न कोई लैब टेस्ट कराया गया,
न गांव में मेडिकल टीम भेजी गई।
ना गांववालों को शुद्ध पेयजल,
ना रक्त और पेशाब जांच,
ना कोई फॉलोअप मेडिकल कैम्प।

बूढ़पुर की हालत ने दिखा दिया — बागपत की स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ नाम की है।

  • नेताओं की चुप्पी इस बात पर नहीं कि गांव मर रहा है —
    बल्कि इस बात पर है कि कहीं इसका राजनीतिक नुकसान न हो जाए।
  • प्रशासन का मौन इस डर से नहीं कि गांव की हालत गंभीर है —
    बल्कि इस वजह से है कि कहीं रमाला मिल पर ऊंगली न उठे।
“बागपत” वेंटिलेटर पर है — बूढ़पुर की मौतों ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल

तो क्या अगली मौत का इंतजार है?

बूढ़पुर के लोग पूछ रहे हैं:

  • क्या हमें डॉक्टर मरने के बाद मिलेंगे?
  • क्या ज़हर के प्रमाण तभी जुटाए जाएंगे जब हर घर में कोई मरेगा?
  • क्या रमाला मिल पर कोई कार्रवाई होगी?
  • और सबसे जरूरी – बागपत को कब मिलेंगे असली डॉक्टर?

यह खबर सिर्फ बूढ़पुर की नहीं,
यह एक पूरे जिले की मेडिकल विफलता की रिपोर्ट है।
जहां अस्पताल तो हैं — पर विशेषज्ञ नहीं।
जहां जांच की बातें तो हैं — पर इलाज नहीं।
जहां सिस्टम खुद ICU में पड़ा है।

“बागपत” वेंटिलेटर पर है — बूढ़पुर की मौतों ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल