Report by : Dr. Ravindra Rana
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भाजपा में गहराया गुटबाजी का संकट, 25 जिलों में जिला अध्यक्षों की सूची फंसी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कल 2 अप्रैल 2025 को गाजियाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की समन्वय बैठक में भाग लेंगे। इसके लिए संघ के पदाधिकारी और भाजपा नेता तैयारियों में जुट गए हैं, और पुलिस प्रशासन भी कार्यक्रम की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने में सक्रिय है!

इसके अलावा, 5 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गाजियाबाद के घंटाघर रामलीला मैदान में आयोजित कश्यप-निषाद महाकुंभ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से कश्यप और निषाद समुदाय के लोग भाग लेंगे, और मुख्यमंत्री उनके कल्याण से संबंधित योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं।

इन कार्यक्रमों के मद्देनजर, गाजियाबाद में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां जोरों पर हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाजियाबाद दौरे को राजनीतिक नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस दौरे में RSS और BJP की समन्वय बैठक के अलावा कश्यप-निषाद महाकुंभ भी शामिल है, लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या लोनी के विधायक नंदकिशोर गुर्जर को सीएम से मिलने का अवसर मिलेगा?

सीएम योगी का गाजियाबाद दौरा: क्या रहेगा एजेंडा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गाजियाबाद दौरा कई अहम आयोजनों के लिए निर्धारित है:

  1. RSS और BJP की समन्वय बैठक: संगठन और आगामी चुनावों की रणनीति पर चर्चा होगी।
  2. कश्यप-निषाद महाकुंभ: इस महाकुंभ के जरिए भाजपा ओबीसी और निषाद समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है।
  3. विकास कार्यों की समीक्षा: विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी।

लोनी विवाद की पृष्ठभूमि

हाल ही में लोनी में आयोजित कलश यात्रा के दौरान भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर और पुलिस के बीच टकराव हुआ था। इस मामले में विधायक पर पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने नंदकिशोर गुर्जर से स्पष्टीकरण मांगा, और अब पार्टी के अंदर भी इस मामले को लेकर गहमागहमी बनी हुई है।

गाजियाबाद में सीएम योगी : लोनी विवाद के बीच क्या नंदकिशोर गुर्जर से होगी मुलाकात?

एयरमैन सत्यवीर गुर्जर ने विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि यह घटना योगी सरकार को अस्थिर करने की साजिश का हिस्सा थी। उनके अनुसार, विधायक ने बिना अनुमति के कलश यात्रा निकालने की कोशिश की, जिसे रोकने पर पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई। इस दौरान विधायक ने पुलिस अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें धमकियाँ दीं। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें विधायक को पुलिस अधिकारी का गला दबाने की कोशिश करते हुए देखा जा सकता है।

इस विवाद को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने विधायक नंदकिशोर गुर्जर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा था। विधायक ने अपनी सफाई मीडिया में सार्वजनिक की, लेकिन पार्टी ने इसे आंतरिक मंच पर उठाने की नसीहत दी है।

क्या सीएम योगी मुलाकात करेंगे?

1. संभावना कम:

पार्टी हाईकमान पहले ही इस विवाद से दूरी बना चुका है, और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। ऐसे में सीएम योगी का इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहना या नंदकिशोर गुर्जर से मिलना मुश्किल लग रहा है।

2. बैठक में अप्रत्यक्ष संदेश:

गाजियाबाद में भाजपा और RSS की समन्वय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पार्टी अनुशासन पर ज़ोर दे सकते हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिलेगा कि संगठन में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

3. गुर्जर वोटबैंक की चिंता:

लोनी क्षेत्र में गुर्जर समुदाय का प्रभाव है, और नंदकिशोर गुर्जर खुद को गुर्जर नेतृत्व का मजबूत चेहरा बताते रहे हैं। भाजपा, पश्चिमी यूपी में इस समुदाय को अपने पक्ष में बनाए रखना चाहती है। ऐसे में यदि विधायक पर सख्त कार्रवाई होती है, तो इसका असर समुदाय पर भी पड़ सकता है।

राजनीतिक विश्लेषण:

  • नंदकिशोर गुर्जर के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। अगर वे मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पाते हैं और अपना पक्ष रखते हैं, तो यह उनके राजनीतिक करियर के लिए राहत भरा होगा।
  • अगर मुलाकात नहीं होती, तो यह संकेत होगा कि भाजपा नेतृत्व फिलहाल उनसे दूरी बनाए रखना चाहता है।
  • RSS और BJP की समन्वय बैठक में आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बड़े फैसले हो सकते हैं। पार्टी इस समय अनुशासन और सरकार की छवि को प्राथमिकता दे रही है।

भविष्य की राजनीति पर असर

इस घटना के बाद भाजपा के भीतर नंदकिशोर गुर्जर की स्थिति कमजोर होती दिख रही है। अगर पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की, तो यह उनके 2027 के राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा साबित हो सकता है। दूसरी ओर, अगर उन्हें पार्टी के मंच पर अपनी बात रखने का मौका मिला, तो वे अपनी राजनीतिक पकड़ को फिर से मजबूत कर सकते हैं।

महज़ संयोग नहीं :

नंदकिशोर गुर्जर का लोनी विवाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गाजियाबाद दौरा संयोग मात्र नहीं है। यह भाजपा की संगठनात्मक शक्ति और अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास भी है। अब देखना होगा कि इस दौरे के बाद लोनी विवाद पर पार्टी क्या रुख अपनाती है और क्या विधायक नंदकिशोर गुर्जर को कोई राहत मिलती है या नहीं।