Report by : Dr. Ravindra Rana
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मेरठ। गुदड़ी बाजार के कुख्यात तिहरे कत्ल की वारदात में शामिल नौ खूनी मुजरिमों की जमानत अर्जी को हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है, जबकि कत्ल की साज़िश में उकसाने वाली शीबा सिरोही को अदालत से राहत मिल गई।

तिहरे कत्ल की खौफनाक दास्तान
23 मई 2008 की दोपहर बालैनी नदी के किनारे तीन लाशें बरामद हुईं, जिनकी शिनाख्त सुनील ढाका (27), पुनीत गिरि (22) और सुधीर उज्ज्वल (23) के रूप में हुई। वारदात की जांच में खुलासा हुआ कि 22 मई की रात गुदड़ी बाजार में हाजी इजलाल कुरैशी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर इन तीनों की हत्या कर दी थी।

कत्ल का सबब बनी शीबा सिरोही
इजलाल की करीबी शीबा सिरोही इस खूनी खेल की सूत्रधार थी। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में बताया कि उसने ही इजलाल को तीनों को रास्ते से हटाने के लिए भड़काया था। 22 अगस्त 2008 को कोतवाली पुलिस ने 14 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी।

कानूनी दांव-पेच और इंसाफ की जंग
अगस्त 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने रोज़ाना सुनवाई के आदेश दिए। 10 जुलाई 2024 तक इस केस की लगातार सुनवाई हुई, जिसके बाद 10 आरोपियों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई। मुकदमे के दौरान हत्याकांड के दो आरोपी इसरार और माजिद की मौत हो चुकी है। एक आरोपी शम्मी जेल में है, उसका ट्रायल चल रहा है। एक आरोपी को नाबालिग बताए जाने के चलते हाईकोर्ट में अपील विचाराधीन है।

जेल की सलाखों के पीछे से कोर्ट तक

2023 में इजलाल पक्ष की तरफ से हाईकोर्ट में जमानत अर्जी लगाई, 14 साल जेल में रहने के चलते जमानत मिल गई थी। सभी नौ आरोपी तब से बाहर थे। एक अगस्त 2024 को कोर्ट ने इजलाल और उसके भाई अफजाल, महराज, कल्लू उर्फ कलुआ, इजहार, मुन्नू ड्राइवर उर्फ देवेंद्र आहूजा, वसीम, रिजवान, बदरुद्दीन पर हत्या समेत तमाम धाराओं और शीबा सिरोही पर हत्या के लिए उकसाने के आरोपों को सही मानते हुए दोषी करार दिया था। पांच अगस्त को आरोपियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
तिहरे हत्याकांड में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। शीबा सिरोही के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज हुआ था। इजलाल के मुकदमे में 27 गवाह और शीबा के मुकदमे में 12 गवाह पेश किए गए थे
इजलाल, अफजाल, महराज और शीबा अभी भी मेरठ जेल में हैं, जबकि इजहार, देवेंद्र आहूजा, वसीम, रिज़वान, अब्दुल रहमान उर्फ कल्लू और बदरुद्दीन को आगरा सेंट्रल जेल भेजा गया था। वर्ष 2023 में इजलाल पक्ष ने हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की थी, जिसके चलते सभी नौ दोषी पिछले साल से जेल से बाहर थे।

हाईकोर्ट का सख्त रुख
1 अगस्त 2024 को कोर्ट ने इजलाल और उसके भाइयों समेत नौ आरोपियों को हत्या, साज़िश और अन्य संगीन धाराओं में दोषी करार दिया था। 5 अगस्त को इन्हें उम्रकैद की सज़ा सुना दी गई। अब हाईकोर्ट ने उनकी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है, जिससे इन सभी को फिर से सलाखों के पीछे जाना होगा।

कत्ल, मोहब्बत और ग़द्दारी की दास्तान
कैप्टन की तलाकशुदा बीवी शीबा सिरोही और इजलाल के बीच नज़दीकियां थीं। लेकिन सुनील ढाका, पुनीत गिरि और सुधीर उज्ज्वल इस रिश्ते के खिलाफ थे। पहले इजलाल ने इनसे सुलह कर ली थी, मगर शीबा को यह गवारा न था। उसने इजलाल को तीनों का सफाया करने पर मजबूर कर दिया। 22 मई 2008 की रात, इजलाल ने तीनों को बातचीत के बहाने बुलाया और मौत की नींद सुला दिया।

अभी भी बाकी है इंसाफ की लड़ाई
इस केस में दो मुकदमे दर्ज हुए थे। शीबा के खिलाफ हत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें 12 गवाह पेश किए गए। वहीं, इजलाल के मुकदमे में 27 गवाहों की गवाही हुई। हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद अब इन खूनी खेल के किरदारों के लिए जेल का दरवाजा फिर से खुल गया है।